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नूतन वर्ष के पूर्व संध्या पर जनपद वासियों को हार्दिक बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामन
December 31, 2019 • समाचार

जिलाधिकारी रायबरेली शुभ्रा सक्सेना, पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई ने नूतन वर्ष के पूर्व संध्या पर जनपद वासियों को हार्दिक बधाई देने के साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करने के साथ ही वही अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आमजनों से नव वर्ष व पर्वों को देखते हुए कानून एवं शान्ति व्यवस्था दुरूस्त रखने के निर्देश-अपील की है। क्षेत्रों का भ्रमण किया ड्यूटी पर तैनात सेक्टर मजिस्टेªट, जोनल मजिस्टेªट तथा पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये कि सर्तक सजग रहकर पूरी तरह से मुस्तेद रहे। असामाजिक तत्वों पर कड़ी नजर रखने के साथ ही उन पर कार्यवाही करने पर किसी भी प्रकार का शिथिलता व लापरवाही न बरती जाये। नववर्ष पर शान्ति व शालीनता के साथ आपसी भाईचारे के साथ मनाने के साथ ही समाज के जागरूक वर्ग बुद्धिजीवी वर्ग तथा जनमानस को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 सीएए के लिए जागरूक भी करते रहे। 
 चिड़ियाखाना खोयामण्डी स्थित राजकीय सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र में विभिन्न प्रशिक्षण लेने आये छात्र-छात्राओं को जहां पर फलों, सब्जियों प्रशिक्षण के साथ ही खाद्य एवं प्रसंस्करण व उद्यमिता विकास के बारे में बताया जा रहा है। राजकीय सामुदायिक फल संरक्षण एवं प्रशिक्षण प्रभारी जगतपाल कौशल, पूर्व खाद्य एवं प्रसंस्करण अधिकारी एस.एम. असकरी ने कहा कि छात्र-छात्राओं को सीएए के बारे में सूचना विभाग के पम्पलेट वितरित करके कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 कानून सिर्फ नागरिकता देने के लिए है किसी की नागरिकता छीनने का अधिकार इस कानून में नही है। भारत के अल्पसंख्यकों विशेषकर मुसलमानों का नागरिकता संशोधन अधिनियम से कोई अहित नहीं है। नागरिकता संशोधन अधिनियम से देश के नागरिकों की नागरिकता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह कानून किसी भी भारतीय हिन्दू, मुसलमान आदि को प्रभावित नहीं करेगा। इस अधिनियम के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से आए हिन्दू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी जायेगी जो 31 दिसम्बर 2014 से पूर्व ही भारत में रह रहे हों तथा जो केवल इन तीन देशों से धर्म के आधार पर प्रताड़ित किए गए हों। अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। यह कानून केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने वर्षो से बाहर उत्पीड़न का सामना किया और उनके पास भारत आने के अलावा और कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि आमजनों को सीएए के बारे में जागरूक करे तथा पम्पलेट वितरित करे।