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पाल समाज का पारिवारिक एकता सम्मेलन
March 18, 2020 • लखनऊ। • News

अखिल भारतीय पाल महासभा, शाखा लखनऊ का 24वां होली मिलन एवं पारिवारिक एकता सम्मेलन का शुभारम्भ विश्व की प्रथम कुशल प्रशासिका व लोकतांत्रिक ढंग से विशाल होलकर राज्य का संचालन करने वाली शासिका लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर तथा नारी जागरण के लिए जीवन पर्यन्त समर्पित स्व. सुश्री उर्मिला पाल, एडवोकेट तथा अखिल भारतीय महासभा की महिला प्रकोष्ठ की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके तथा भावपूर्ण पुष्पांजलि अर्पित करके हुआ। देश के सबसे बड़े प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रूपरेखा कड़ी मेहनत, सूझबूझ तथा योजनाबद्ध ढंग से बनाकर पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श माॅडल का स्वरूप प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया गया था। इस हेतु सभी ने महासभा की लखनऊ शाखा की समर्पित टीम की सभी ने मुक्त कंठ से सराहना की। भव्य सम्मेलन का संचालन महिला जागरण के प्रबल समर्थक तथा प्रसिद्ध समाजसेवी उमा शंकर पाल ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं तथा वरिष्ठों का फूलमालाओं तथा अंग वस्त्र पहनाकर हुआ। 
 

सम्मेलन में मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में नानकदीन भर्जी, पूर्व राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, योगेन्द्र पाल, राष्ट्रीय महासचिव, अखिल भारतीय पाल महासभा, पाल सिंह पाल, मुरादनगर, अध्यक्ष, अखिल भारतीय पाल महासभा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रघुनन्दन पाल, अध्यक्ष, मेरठ मण्डल, अखिल भारतीय पाल महासभा, मुरादनगर, डा.पी.के. पाल, पूर्व सीएमओ, वाराणसी, डा. ललिता पाल, वरिष्ठ दंत चिकित्सक, वाराणसी, महेश पाल, प्रबन्धक, महारानी अहिल्या बाई होल्कर विद्यालय, गोमती नगर, लखनऊ, राम राज गांधी, एडवोकेट, लखनऊ, समाजसेवी जग जीवन पाल, लखनऊ, डा. ओम प्रकाश पाल, फतेहपुर, होरी लाल पाल, हरदोई, योगेन्द्र पाल, हापुड़, बबलू पाल, बदायूं, वेद प्रकाश पाल बदायूं, नीरज सिंह पाल, मेरठ, सुरेश पाल, फतेहपुर, देशराज पाल, बाराबंकी, कमांडो राजवीर धनगर, आगरा, राजवीर सिंह बघेल, कानपुर, इं. राम निवास पाल, राम सागर पाल, पूर्व सांसद प्रत्याशी, वीरेन्द्र कुमार पाल, पूर्व प्रधान, मिश्रिख, सीतापुर, महेश पाल, मण्डलीय मंत्री, पेंशन बचाओ मंच, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, सुरेन्द्र कुमार पाल, गायत्री साधक, लखनऊ आदि-आदि ने विशेष रूप से पधारकर तथा ‘शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता’ विषय पर सारगर्भित व संक्षिप्त सम्बोधन द्वारा समारोह की वैचारिक सफलता में अपना विशेष योगदान दिया। 
 विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के राजनेताओं ने एक मंच पर एकत्रित होकर समाज की एकता का जयघोष किया। सभी के भाषणों का सार यह था कि शिक्षा ही व्यक्ति, परिवार, समाज तथा विश्व के विकास की जननी है। शिक्षा वह शक्तिशाली हथियार है जिसके उपयोग के द्वारा विश्व को बदला जा सकता है। साथ ही वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्या बाई होलकर के ‘सबका भला - अपना भला’ के सिद्धान्त को अपनाने के लिए प्रेरित किया। बनो, अहिल्या बाई होलकर अपनी आत्म शक्ति दिखलाने तथा जय जगत के जयघोष ने सभी को नई ऊर्जा से भर दिया।   
 महासभा की पाल-बघेल-धनगर महिला प्रकोष्ठ से उमा सिंह पाल, सुरे़न्द्र कुमारी, आशा पाल, राजकुमारी पाल, मिथिलेश पाल, संगीता पाल, अदिति पाल, प्रीति पाल, अनीता पाल आदि ने नारी जागरण की अलख जगायी। इस अवसर पर पाल, बघेल तथा धनगर समाज के लोगों ने भारी संख्या में सपरिवार उपस्थित होकर सभी का उत्साह बढ़ाया। पत्रकारिता तथा साहित्य क्षेत्रों से निरंजन सिंह पाल, सम्पादक, हरिकमल दर्पण साप्ताहिक समाचार पत्र, मेरठ, विजय कुमार धनगर, प्रबन्धक, पाल टूडे मासिक पत्रिका, लखनऊ, हास्य कवि रमेश चन्द्र पाल, प्रसिद्ध कवि राम नरेश पाल, वरिष्ठ संवाददाता नित्य नाथ तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार डीएन वर्मा, अशोक पाल, सम्पादक तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के बन्धुओं ने अपनी उपस्थिति से सभी का उत्साह बढ़ाया।
 विशेष अतिथि निरंजन सिंह पाल, सम्पादक, हरिकमल दर्पण साप्ताहिक समाचार पत्र, मेरठ ने लेखन में रूचि रखने वाले युवाओं को पत्रकारिता से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा यथार्थवादी तथा वास्तविक विचारों को जन-जन तक पहुॅचाया जा सकता है। श्री पाल ने सत्य की स्वतंत्र खोज करने के लिए विशेषकर युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कल्पनिक, रूढ़िवादी तथा अंध विश्वास से समाज को बचाने के लिए विज्ञान आधारित विचारों को अपनाना चाहिए। उन्होंने बुके के स्थान पर बुक भेंट करने की नई परम्परा चलाने की प्रेरणा दी। श्री पाल ने लखनऊ के वरिष्ठ समाजसेवी 
पी.के. सिंह पाल को हरिकमल दर्पण साप्ताहिक समाचार पत्र के लिए लखनऊ के आसपास के समाचारों को नियमित रूप से लिखकर भेजने के लिए वरिष्ठ पत्रकार का दायित्व सौंपा। ताकि 21वीं सदी की विश्वव्यापी समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने वाले वैश्विक विचारों के द्वारा समाज की युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन किया जा सके। 
 श्री विजय पाल, अध्यक्ष, अखिल भारतीय पाल महासभा, शाखा लखनऊ ने कहा कि समाज में सामूहिक विवाह के आयोजन अधिक से अधिक होने चाहिए ताकि खर्चीली शादियों में होने वाले धन के अपव्यय को रोका जा सके। साथ ही वैवाहिक परिचय के कार्यक्रम में युवक-युवतियों को आगे आकर अपना परिचय मंच से देना चाहिए। ताकि उन्हें मन पसंद जीवन साथी मिलने में सुविधा हो। उन्होंने बताया कि पारिवारिक एकता ही विश्व एकता की आधारशिला है। महासचिव इन्द्र मोहन पाल ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कर्म तथा कर्तव्य पालन को सबसे बड़ा धर्म बताया। विदित हो कि वरिष्ठ इन्द्र मोहन पाल द्वारा निःशुल्क वैवाहिक मैरिज ब्यूरो का दायित्व भी सफलतापूर्वक निभाया जा रहा है। 
 राम राज गांधी, एडवोकेट ने अपने विचारों द्वारा लखनऊ के निर्माणाधीन पाल भवन के लिए तन, मन धन से सहयोग करने तथा समाज की पत्र-पत्रिकाओं के सदस्य बनने के लिए परिजनों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का दायरा केवल अच्छी नौकरी पाने तक ही सीमित नहीं है वरन् शिक्षा मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। इसलिए हमें जीवन पर्यन्त कुछ-कुछ सीखने का अपना स्वभाव विकसित करना चाहिए। इंसान को अपने अंदर के बालक को सदा जिन्दा रखना चाहिए। ताकि उसके अंदर सदैव कुछ नये सीखने तथा सारगर्भित पढ़ने-सुनने की उत्सुकता सदैव बनी रहे। उन्होंने बताया कि पाल भवन की एक मंजिल समाज के शैक्षिक, वैवाहिक, जन्म दिवस, सामाजिक आदि कार्यक्रमों के लिए लगभग बनकर तैयार है। आगे से उन्होंने समाज के कार्यक्रमों को पाल भवन में आयोजित करने के लिए सभी को आमंत्रित किया। 
 लखनऊ की श्रीमती उमा सिंह पाल, वोटरशिप समर्थक जग जीवन पाल तथा गायत्री परिवार के सुरेन्द्र कुमार पाल की ओर से ‘‘जय जगत तथा वोटरशिप बुक स्टाॅल’’ लगाया गया जो कि समारोह का विशेष आकर्षण के केन्द्र रहा। इस बुक स्टाॅल का संयोजन जय जगत तथा वोटरशिप विचार के चिन्तक पी.के. सिंह पाल द्वारा किया गया। इस जय जगत तथा वोटरशिप बुक स्टाॅल में उपलब्ध पुस्तकों पाल भारती, पाल बघेल टाइम्स, पाल टूडे, धनगर पाल कुटुम्ब स्मारिका (कानपुर), हरिकमल दर्पण साप्ताहिक समाचार पत्र, मेरठ के बारे में समाज के लोगों जानकारी प्राप्त की। जय जगत के विचारों से ओतप्रोत प्रसिद्ध शिक्षाविद् डा. जगदीश गांधी द्वारा लिखित तथा वोटरशिप विचार के जन्मदाता विश्वात्मा द्वारा लिखित पुस्तकों को भी बुक स्टाॅल में प्रदर्शित किया गया था। 
 महासभा के संरक्षक वरिष्ठ शैक्षिक चिन्तक पी.के. सिंह पाल ने कहा कि लोकमाता अहिल्या बाई ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर समाज की सेवा की थी। उन्होंने अपने होलकर राज्य से बाहर जाकर अन्य राज्यों में अपने युग की आवश्यकता के अनुसार मंदिर, कुऐं, धर्मशालायें बनवायी। इस प्रकार उनके प्रेम का दायरा अपने परिवार तथा प्रजा तक ही सीमित न होकर सारी मानव जाति के लिए था। उनका नारी हृदय कभी युद्ध के पक्ष में नहीं रहा था। वह युद्धों में किसी का खून बहाना सहन नहीं कर सकती थी। 
 श्री पाल ने कहा कि अब हमें युगानुकूल विचारों को भी अपनाना होगा। मैं भी अपनी जाति तथा देश से बहुत प्यार करता हूं। मेरी राष्ट्रीयता जय जगत की शिक्षा, वोटरशिप, वसुधैव कुटुम्बकम्, सर्वधर्म समभाव, विश्व नागरिकता, अहिंसा, एकता तथा विश्व बन्धुत्व की प्रबल समर्थक है। इन्हीं सार्वभौमिक विचारों को पहंुचाने के लिए मैं अपने सीमित साधनों तथा अल्प सहयोग के बलबूते पहुंचाने का भरसक प्रयास करता हूं। दुनिया को पांच वीटो पाॅवर से लैश शक्तिशाली देश परमाणु बमों से चला रहे हैं। भारत को दुनिया को कानून तथा संविधान से चलाने के लिए लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई विश्व संसद के लिए पहल करनी चाहिए। जय जगत तथा वोटरशिप के विचार इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 
 समारोह के अन्त में विश्वव्यापी महामारी कोरोना वायरस से दिवंगतों के आत्मा की शान्ति की प्रार्थना की गयी। साथ ही हजारों पीड़ितों के शीघ्र स्वास्थ्य होने की कामना की गयी। यह अपील भी की गयी कि इस महामारी का सामना साहस के साथ तथा आवश्यक सावधानी रखते हुए सभी को करना है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों तथा लखनऊ से पधारे परिजनों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन विजय पाल, अध्यक्ष तथा इन्द्र मोहन पाल, महासचिव द्वारा किया गया। साथ ही गड़रिया परिवार में पैदा हुए होल्कर राजवंश की स्थापना करने वाले शासक श्रीमंत मल्हार राव होल्कर की 16 मार्च को जयन्ती के उपलक्ष्य में सभी को हार्दिक बधाइयाँ दी गयी।