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पंडित जी की सलाह से खुदा मीठा कुआं
November 8, 2019 • जे.पी. पाठक

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के बछरावां कस्बे में एक ठाकुर बाहुल्य गांव पड़ीरा कलां है। सन 1941-42 में ठा. रामशंकर सिंह वहाँ के सरपंच थे। जिनकी बहन का विवाह उस गांव से 6-7 किमी दूर कपूरपुर गाँव में हुआ था जहाँ प. बेनी माघव शुक्ला नाम के विख्यात पंडित हुआ करते थे। पड़ीरा कलां गांव ऊचे पहाड़नुमा टीले पर बसा हुआ था जिसके चारों ओर केवल खारा पानी ही पाया जाता था। ठाकुर साहब एक मीठे पानी का कुआँ खुदवाना चाहता थे। उन्होने इस संबध पंडित जी से सम्पर्क किया पंडित जी ने गणना करके बताया कि एक दिशा में खुदवाओं तो पहले एक मेंढक मिलेगा। उसके कुछ नीचे एक कछुआ मिलेगा। उसके कुछ हाथ नीचे पानी मिलेगा। ठाकुर ने ऐसा ही किया किन्तु पानी नही मिला उन्होंने पंडितजी से पुनः सम्पर्क किया तो उन्होंने ने कहा कि मुझे खुद चलना पड़ेगा। पंडित जी उँट गाड़ी से गाँव आये उन्होंने कुआँ देखकर कहा कि कुआँ नीचे से संकरा हो गया है। उसे पटवा कर उसके बगल में खुदाई करवाई 10-12 फावड़े मारने के बाद मीठे पानी का कुआँ मिला जो आज तक बना हुआ है। 1972-73 में पंडित जी के पुत्र राजा राम शुक्ला की पुत्री का विवाह हुआ था, विवाह के कुछ ही दिन बाद पंडित जी का देहान्त हो गया था।