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फर्जी कागजों के द्वारा लिया गया था शस्त्र लाइसेंस दोष सिद्ध होने पर हुई सजा
November 23, 2019 • पंकज भारती ब्यूरो चीफ झांसी

झांसी। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या 1 हितेश अग्रवाल ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर लाइसेंस हासिल कर दुनाली बंदूक लेने का दोष साबित होने पर गुरसराय थाना क्षेत्र के ग्राम अस्ता निवासी सेना में चालक शिवराम के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत 7 साल का कारावास और पचास हजार जुर्माना जमा करने का निर्णय दिया गया है। दरअसल, 16 जून 2018 को सेना में कैप्टन बीएन शर्मा द्वारा सेना में चालक के पद पर तैनात शिवराम निवासी आस्ता थाना गुरसरांय के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें फर्जी दस्तावेज के आधार पर डबल बैरल बंदूक के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान प्रकाश में आया कि अभियुक्त शिवराम का लंबा अपराधिक इतिहास है। दोष सिद्ध शिवराम जालसाज है, उसके पास दूसरा गन लाइसेंस भी पाया गया जो कि फर्जी है। इसके अंतर्गत झांसी जिला अधिकारी के आदेश से वर्ष 2010 में धारा 419 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था जो अभी विचाराधीन है। सबूतों में यह भी सामने आया कि सन 1992 से अभियुक्त का आपराधिक तानाबाना बुना गया। सुनवाई में यह भी सामने आया कि शिवराम द्वारा फर्जी दस्तावेज देकर डबल बैरल का लाइसेंस बनवाया और रौब गालिब किया जिसके कारण क्षेत्र के लोग दहशत में रहते थे। अभियुक्त के भाई को 6 महीने के लिए जिला बदर किया गया था। वर्तमान में इनके खिलाफ 3 दर्जन से अधिक मामले पंजीकृत हैं।
सेना में ड्राइवर के पद पर रहते हुए भी शिवराम ने आपराधिक व जालसाजी के रवैया अपना कर सेना की छवि को धूमिल किए जाने के आधार पर जमानत याचिका खारिज की गई थी। सुनवाई के बाद धारा 420 के लिए 5 साल का साधारण कारावास, 10000 अर्थ दंड, धारा 467 के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास व 15000 अर्थ दंड, धारा 468 के तहत 5 साल का कारावास व 10000 अर्थ दंड, धारा 471 के तहत 7 वर्ष का साधारण कारावास व 15000 अर्थ दंड से दंडित किया गया। अर्थदंड की धनराशि अलग-अलग चुकानी होगी जबकि सभी सजाएं एक साथ चलेगीं।