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पूरे हिन्दुस्तान से रुबरु कराती गजलें: डाॅ. ममता
May 5, 2020 • इम्तियाज अहमद गाजी • Views

प्रयागराज। सुमन ढींगरा दुग्गल की रचनाओं में प्रेम, भाईचारा, संवेदनाएं सभी कुछ हैं। इनकी गजलें में उर्दू, फारसी और हिन्दी का इतना बढ़िया समावेश है कि एक तरह से पूरे हिन्दुस्तान से रुबरु कराती हैं। इनकी भाषा इतनी सरल और सहज है कि सभी के दिल को छू जाए। उनकी शायरी में जो एहसास है वो एक अनुभवी कलम ही लिख सकती है। यह बात नोएडा की मशहूर कवयित्री डाॅ. ममता सरूनाथ ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित आॅनलाइन परिचचर्चा में सुमन ढींगरा दुग्गल की गजलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते कहीं। नरेश महरानी ने कहा कि सुमन ढींगरा दुग्गल आप साहित्य कला की सभी विधाओं का प्रयोग करते हुए शायरी करती हैं, और उसमें सफल भी दिखती हैं। रचनाओं में विविधताओं का संगम करते हुए नायाब गजलें लिखती हैं। इनके कथ्य में भाई चारा प्रेम, सामाजिकता और मोहब्बत का भरपूर समावेश है। जमादार धीरज
ने कहा कि सुमन ढींगरा दुग्गल हिन्दी उर्दू मिश्रित भाषा में बहुत संजीदा और बेहतरीन गजलें कहती हैं। अदृश्य की ताकत की तरफ संकेत करते बरसात के मौसम मंे  धरती के सौन्दर्य का मनोरम चित्र इस शेर में देखिए-‘गुलों के रंग आखिर कौन भरता है बहारों में/चुनर बरसात मे धरती को कौन देता है।’ इनकी शायरी बेहद शानदार है।
अना इलाहाबादी ने कहा कि सुमन ढींगरा दुग्गल एक बेहतरीन शायरा हैं, जो हिन्दी और उर्दू दोनों भाषा के लफ्जों का अपनी शायरी में बेहतरीन प्रयोग करतीं हैं। इनकी गजलों में हिन्दी की सहजता और उर्दू की नफासत नजर आता है। आप का व्यक्तित्व बेहद सकारात्मक ,सरल और सादगी से भरपूर है और यही इनकी गजलों में भी परिलक्षित होता है। संजय सक्सेना ने कहा गजलें पढ़ने के बाद यह कहने में कोई हर्ज नहीं की सुमन दुग्गल गजल की दुनिया का चमकता सितारा है। उनकी कलम जब चलती है तो यह लगता है कि तरुन्नम में बात कही जा रही है। मनमोहन सिंह तन्हा, अतिया नूर, रमोला रूथ लाल आरजू, शगुफ्ता रहमान, ऋतंधरा मिश्रा, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, अर्चना जायसवाल ‘सरताज’, सागर होशियारपुरी, रचना सक्सेना, तामेश्वर शुक्ल ‘तारक’, शैलेंद्र जय और अनिल मानव ने विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। बुधवार को गाजियाबाद के डीएसपी डाॅ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ की गजलों पर परिचर्चा होगी।