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प्रचीनतम वेधशाला
November 9, 2019 • डी.एस. परिहार

पेरू (द. अमेरिका) के उत्तरी तट पर निम्न पठारी दरार में एक टीले पर चूने पत्थरों से निर्मित चंकेलों के तेरह टावर स्थित हैं। पूरात्वविदों के अनुसार 23,00 वर्ष पुराने यह टावर किसी प्राचीन सौर वेधशाला के अंग है। पेरू की राजधानी लीमा के उत्तर मे 23,00 साल पुरानी पत्थर के टावरों की यह श्रंखला अमेरिका की अब तक ज्ञात प्रचीनतम वेधशाला है। पुरात्वविदों के अनुसार प्रस्तर चिन्हों की यह श्रंखला आकाश में सूर्य के परिक्रमा मार्ग को इंगित करती है। पेरू के प्राचीन सौरविज्ञानी इंका की प्राचीन सौर संस्कृति से दो मिलियन पूर्व संषोधित सूर्य पूजा करते थे। पेरू (द. अमेरिका) के उत्तरी तट पर निम्न दरार में एक टीले के चंकेलों के तेरह टावर ईसा से चार सदी पूर्व र्धािर्मक उत्सवों भवनों के समूहो का हिस्सा है। घाटी मे सतह से यह पत्थर 4 से 6 मीटर उंचे यह पत्थर है, इसके चार कि.मी. क्षेत्र मे कई भवन और ढाँचे है। इनमे से दो ढांचे 13 पत्थरों की श्रंखला के पूर्व और पश्चिम मे स्थित हैं। पूर्व उत्खनन मे एक ढांचे के चारों और बर्तन, ढक्कन और पत्थरों के टूटे टुकड़े पाये गये थे। यह स्थान 19 वीं सदी मे खोजा गया था। कुछ विद्वान इसे सूर्य के साथ चन्द्रमा के भी परिक्रमा पथ से जोड़ते है। पेरू में राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थान के निदेशक इवान गेजी के अनुसार बर्तन और ढक्कन धार्मिक कार्यकलापों मे प्रयोग किये जाते थे। गेजी और लीस्टिर विश्वविद्यालय के पुरा खगोलषास्त्री क्लाइव रगल्स ने अपनी षोधों मे पाया कि दो खंडित ढांचे निरीक्षण स्थल थे जहाँ से लोग टावरों का निरीक्षण करते थे। उनकी टीम ने साल भर सूर्य की स्थितियों और पत्थर के टावरों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया और 300 ईसा पूर्व जून और दिसम्बर की विषुव सं़क्रान्तियों मे धार्मिक उत्सवों को परखा तो पाया कि किसी भी निरीक्षण स्थल से पत्थरों का फैलाव संक्षिप्त रूप से सूर्य की गतियों का पूर्णतः अनुसरण करता है। और सूर्य की स्थितियों का हर दो-तीन दिन मे सही रूप मे चिन्हित करता है। षीत और ग्रीष्म संक्रान्तियों मे सूर्य की स्थिति बिलकुल इसके समान ही थी। टावरों की लाइन के किसी भी किनारे के बिन्दू से जब विपरीत निरीक्षण स्थल को देखते है। तो परिणाम सूर्य की आकाशीय स्थिति के अनुसार ही आते है। इसके अलावा 13 पत्थरों के समूह के कोई भी दो पत्थरों के मध्य का नियमित अंतर बताता है कि इसे सौर कलैण्डर के दिनों की गणना करने के लिये व्यवस्थित किया गया था जिससे सौरवर्ष के दिनों की गणना की जा सकती है। इसे इंका सभ्यता से 17,00 वर्ष पूर्व बनाया गया था। टावरों की श्रंखला शीत और ग्रीष्म संक्रान्तियों से पूर्ण रूप से संबधित हैं।