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प्रैक्टिकल मौजू पर शायरी करते हैं बुद्धिसेन: डाॅ. समर
May 4, 2020 • इम्तियाज अहमद गाजी • Views

जिस तरह चांद और तारों की रोशनी किसी की मोहताज नहीं, उसी तरह शायर बुद्धिसेन शर्मा किसी भी परिचय के मोहताज नहीं, इनकी शायरी में तमाम खूबसुरत पहलू आपको साफ तौर पर नजर आयेंगे। उनकी शायरी बिल्कुल आज के हालात को छूकर गुजरती है। वे प्रैक्टिकल मौजू पर शायरी करते हैं। उनका अंदाज-बयान खूबसूरत हैं, जिसकी वजह से सुनने और पढ़ने वाले पर फौरन असर छोडने में कामयाब हो जाते हैं। यह बात कुशीनगर के मशहूर शायर डाॅ. इम्तियाज समर ने गुफ्तगू द्वारा आयोजित आॅनलाइन साहित्यिक परिचर्चा में बुद्धिसेन शर्मा की शायरी पर विचार व्यक्त करते हुए कही। वरिष्ठ शायर सागर होशियारपुरी ने कहा कि बुद्धिसेन शर्मा गंगा जमुनी भाषा में शायरी करते हैं और उर्दू के अल्फाज में इजाफत के इस्तेमाल से परहेज करते हैं ताकि भाषा जटिल न हो। उनकी शायरी में दर्द के एहसास और मोहब्ब्त की खुश्बू आती है, वहीं इंसान के किरदार में गिरावट और दोस्ती में बेवफाई की जिक्र दिखता है। प्रकृति और अन्य विषयों पर अशआर करते हैं जो सुनने वालों के दिलों में उतर जाता है। इश्क सुल्तानपुरी के मुताबिक वर्तमान में साहित्य की हर विधा के मर्मज्ञ और सार्थक गजलों के कारीगर बुद्धिसेन शर्मा द्वारा गजल लेखन का आदर्श
स्थापित किया गया है। आज आपाधापी के दौर में जहाँ भाषा के व्याकरण और सौंदर्य को दरकिनार कर रचनाकार सस्ती लोकप्रियता के फेर में लगे रहते हैं, ऐसे समय मे विशुद्ध साहित्य साधना में शर्मा जी लगे हुए हैं। आपकी गजलें आमफहम जबान मे मानव जीवन के सभी पहलुओं की चिंता करती हैं। अपने जीवन के सतत संघर्ष और दुखों को जमा पूंजी बनाकर आपने बुजुर्गों द्वारा डाली गयी नींव पर गजलों का एक सलोना संसार बनाया है। ऋतंधरा मिश्रा ने कहा कि बुद्धिसेन शर्मा की गजलें आज के परिवेश में सटीक दिखती हैं और आम आदमी भी बड़ी आसानी से लफ्जों के भाव को समझ सकता है। इन्होंने  सामाजिक सरोकारों पर व्यंग्य रिश्तो के आपसी कशमकश तो कहीं श्रृंगारमय मोहब्बत, जिंदगी के सभी आयामों पर अपने चिंतन को बड़ी ही खूबसूरती से शायरी में व्यक्त किया है। इनके अलावा मनमोहन सिंह तन्हा, शैलेंद्र जय, डॉ. ममता सरूनाथ, डॉ. शैलेष गुप्त वीर, रमोला रूथ लाल, नरेश महारानी, जमादार धीरज, शगुफ्ता रहमान, प्रभाशंकर शर्मा, संजय सक्सेना, नीना मोहन श्रीवास्तव, सुमन ढींगरा दुग्गल, रचना सक्सेना, विजय प्रताप सिंह, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, अनिल मानव, सुनील दानिश और अर्चना प्रयागराज ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। मंगलवार को सुमन ढींगरा दुग्गल की शायरी पर परिचर्चा होगी।