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प्रिया की शायरी में सौंदर्य के सुंदर भाव: ऋतंधरा
May 12, 2020 • इम्तियाज अहमद गाजी • Views

प्रयागराज। प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम् की कलम से सौंदर्य का सुंदर भाव, मनुष्य की जीवन शैली, सामाजिक रीति-रिवाजों पर कटाक्ष आपातकालीन स्थिति की व्यथा मानवता से प्रेम और सिंगार का भाव पिरोते रोते हुए अपनी रचना में एक सुंदर माला बनाने का प्रयास किया है। सहज और सरल शब्दों की अभिव्यक्ति जन-जन तक पहुंचेगी, इस सकारात्मक भाव का सोच लिए अपनी रचनाओं में बड़े ही आत्मविश्वास और दृढ़ता से कहना एक सच्चे कलमकार की निशानी है, जो प्रिया की शायरी में मौजूद है। यह बात गुफ्तगू द्वारा आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा में कवयित्री ऋतंधरा मिश्रा ने प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम की शायरी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते कही। नोएडा के मशहूर गजलकार विज्ञान व्रत के मुताबिक प्रिया श्रीवास्तव में एक सर्जनात्मक तड़प दिखाई पड़ती है। अपने मन को रचनाओं में उकेरने के लिये प्रिया का शब्द-चयन उनके कहन को एक खास किस्म की धार देता हुआ नजर आता है। मुझे विश्वास है कि शीघ्र ही प्रिया का ‘अपना वैशिष्ट्य’ उनकी गजलों के द्वारा एक पहचान को प्राप्त करेगा। समुन ढींगरा दुग्गल ने कहा कि प्रिया श्रीवास्तव ‘दिव्यम’ उम्दा शायरा हैं। इनकी गजलों में शालीन स्पष्टवादिता, अनुभव जन्य परिपक्वता और कोमलता दिखाई देती है। इस की
अनुभूति पाठकों को गजलें पढ कर होती है। इनके अशआर आशावादी हैं। जीवन के कई पक्षों पर इन्होंने अशआर कहे हैं, जो काबिले-तारीफ हैं।
शैलेंद्र जय ने कहा कि देखने-सुनने में जितनी चमकदार हैं ये गजलें, उतनी ही पढ़ने में पाठक को प्रकाशित करने वाली हैं। दिव्यम की शायरी सीधी-सादी जुबान में प्यार मोहब्बत की बातें करती हुई सादगी से भरे सौंदर्य वाली शायरी है, जो हमें भली भी लगती है और जुबान पर चढ़ भी जाती है। वस्तुतः यह जीवन के बहुत सारे क्षणों को अपने में समेट लेने वाली रचनाएं हैं। इनके अलावा जमादार धीरज, मनमोहन सिंह तन्हा, नरेश महारानी, अनिल मानव, डाॅ. नीलिमा मिश्रा, डॉ. ममता सरूनाथ, संजय सक्सेना, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’, डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’, सागर होशियारपुरी और रचना सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए। संयोजन गुफ्तगू के अध्यक्ष इम्तियाज अहमद गाजी ने किया। बुधवार को कुशीनगर के शायर डाॅ. इम्तियाज समर की गजलों पर परिचर्चा होगी।