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समाज की बेहरत तर्जुमानी करते हैं डाॅ. तूफान: गाजी
May 6, 2020 • प्रयागराज। • Views

पुलिस अफसर होते हुए भी डाॅ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ के अंदर मानवता, कोमलता, संवेदनशीलता और गंभीरता कूट-कूट कर भरी हुई है। यही वजह है कि अपने सख्त ड्यूटी से थोड़ी फुर्सत मिलते ही कलम उठा लेते हैं और अपने दर्द और चिंता शायरी के जरिए कागज उतारना शुरू कर देते हैं, जो शायरी का रूप ले लेती है। इनकी खासियत यह है कि इन्होंने गजल के अरूज और बह्र सीखकर शायरी शुरू की है, जो कई मायने में अन्य लोगों से बेहतर और प्रशंसनीय है। इनके अशआर समाज और पुलिस विभाग को रेखांकित करते हुए एक तरह से दोनों की तर्जुमानी करते हुए कहते हैं- 
सियासी हो गए हो तुम लगे करने सलीके से,
इधर आवाम की बातें, उधर सरकार की बातें। 
बिना किसी संकोच के कहा जा सकता है कि इनकी शायरी आज के समाज और परिवेश में एक तरह से मिसाल हैं। यह बात इम्तियाज अहमद गाजी ने गुफ्तगू की ओर से आयोजित आॅनलाइन परिचर्चा में गाजियाबाद में तैनात डीएसपी डाॅ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ की शायरी पर विचार व्यक्त करते हुए कही। शैलेंद्र जय ने कहा कि डॉ. तूफान की गजलें जदीद और इश्किया शायरी का नायाब और खूबसूरत संगम है। समाज के चलन और ढर्रे की ऐसी और इतनी साफगोई से नक्काशी कि जदीदियत का मुजस्सम दीदार हो जाए और उसके ताने-बाने को रेशे-रेशे उघाड़ दे। कवयित्री नीना मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस विभाग में सख्त ड्यूटी और अनुशासन में रहते हुए कोमल हृदय डाॅ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ अत्यंत भावपूर्ण रचनायें कर रहे हैं, जो काबिले तारीफ हैं, और विभाग की छवि लोगों के जेहन में बदल रही है। उनकी गजलों में विविध रंगों और प्रतीकों का मेल देखने को मिलता है। सादगी और सलीके से कही गई शायरी अन्तरमन को छूती है। उनके कहने का अन्दाज सोचने पर मजबूर करता है कि वाकई शायर कितनी गहराई से अपने अनुभवों को शेरो-शायरी में जज्ब करके पेश करता है।
शगुफ्ता रहमान ने कहा कि डॉ. तूफान की आशिकाना अंदाज में लिखी गई गजलें आशिकों के दिलों में तूफान मचा देने के लिए काफी हैं। आपने जिस संयम, अनुशासन और दूरदर्शिता से अपनी गजलों में शब्दों को सटीक स्थान दिया है, वह आपके पद एवं लकब दोनों को प्रमाणित करता है। नरेश महारानी, मनमोहन सिंह तन्हा, दया शंकर प्रसाद, ऋतंधरा मिश्रा, डॉ. ममता सरूनाथ, सुमन ढींगरा दुग्गल, संजय सक्सेना, अर्चना जायसवाल ‘सरताज’, रमोला रूथ लाल ‘आरजू’, सागर होशियारपुरी और रचना सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए। गुरुवार को शैलेंद्र कपिल की कविताओं पर परिचर्चा होगी।