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शनि नपुंसकता भी देता है
November 30, 2019 • डी.एस. परिहार

सेक्स वैवाहिक जीवन का अनिवार्य स्तम्भ और आधार है। शनि विवाह यौन संबध को समाजिक, धार्मिक और मर्यादित मान्तयता प्रदान करता है। जो ना केवल संतानोपत्ति प्रदान करता है। बल्कि स्त्री-पुरूषों को शारीरिक व मानसिक सन्तुष्टि व उर्जा प्रदान करता है। किन्तु कभी-कभी अनेक कारणांे से स्त्री-पुरूष अपनी शारीरिक और मानसिक अक्षमताओं के कारण सामान्य सहवास नही कर पाते हैं, जो नपुंसकता कहलाता है। यह अभिशाप वैवाहिक जीवन को नष्ट कर देता है। सेक्स के प्रति अनिच्छा, भय, जननेन्द्रियों में स्वभाविक उत्तेजना ना आना, शाीघ्र पतन इस श्रेणी मे आते हैे। इसके कारण शर्मिन्दगी, अपमान, हीनभावना, अवैध संबध, हत्या आत्महत्या, काम में व्यस्तता का बहाना आदि दुष्परिणाम सामने आते हैं। नपुंसकता के अनेक ग्रह योगांे का वर्णन ज्योतिष गन्थों मे पाया जाता है, जो निम्नलिखित हैं।
- शनि लग्नेश हो और उस पर मंगल केतु की दृष्टि हो तो जातक फोबिया के कारण रूप से नपंुसक हो।
- लग्न में निर्बल शनि राहू से युत हो तो फोबिया के कारण रूप से नपंुसक हो।
- चन्द्रमा शनि व राहू से युत हो तो फोबिया के कारण से नपंुसक हो। 
- अष्ठमेश शनि व राहू के मध्य पापकर्तरी योग मे हो और अष्ठमेश पर गुरू की दृष्टि ना हो।
- सूर्य से 7 वें चन्द्रमा व शनि हो। यह सूत्र भी तब तक घटित नही होता है जब तक चन्द्रमा पाप ग्रस्त या नीच, शत्रु राशि गत पाप दृष्ट ना हो।
- निर्बल मंगल से 7 वें शनि हो।
- अष्ठम भाव में बुध शनि योग हो और चन्द्रमा राहू से युत या दृष्ट हो।
- चन्द्र, राहू, बुध व शनि नपंुसकता के कारक हैं 
- लग्न या सप्तम भाव पर शनि व बुध दोनो की युति व दृष्टि या एक ग्रह की युति व दूसरे ग्रह की दृष्टि नपुंसकता देती है।
- बुध के नद्यत्र, आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती व शनि के पुष्य, अनुराधा, उ. भाद्रपद नक्षत्र और राहू के नक्षत्र के आद्रा, स्वाती और शतभिषा नपुंसकता देते हैं। यदि ये नक्षत्र सप्तम भाव पर उदित हों या लग्न, सप्तम या अष्ठम भाव या अष्ठमेश से उपरोक्त नक्षत्रों का संबध हो तो जातक नपंसुक होता है।
शनि षमन के कुछ टोटके:-
- शुभ नक्षत्र युत शनिवार को 19 हाथ लंबा काला धागा की माला बना कर धारण करें।
- शनिवार को काले कपडे मे भिगोये हुये काले चने, कच्चा कोयला, लोहे का टुकड़ा गुण क मछली से युक्त नदी या तालाब मे डाल दें यह नुस्खा एक साल तक हर शनिवार को करें।
- चांकर सहित आटे की दो रोटी बनायंे एक मे देशी घी और दूसरे मे तेल लगा कर शनिवार को काली गाय को खिलायें।
- नित्य घर मे लोबान सुलगायें।
- न्त्यि भोजन से एक टुकड़ा गाय, कौवे और कुत्ते के लिये निकालें।
- बूंदी के चार लडडू शनिवार को गाय को खिलायें।
- मकान मे लोहे का फर्नीचर प्रयोग करें।
- गुड़, चावल, शहद की शीशी, तांबा एक नये लाल कपडे़ मे बांध कर मकान मे टांग दे।
- बच्छोल की जड़ तावीज मे धारण करें।
- श्रीभागवत के नल चरित्र का पाठ करें।
- सफेदा या युकेलिप्टस के पत्ते अपने पास रखे।
- काली गाय को गुड़ रोटी खिलायें।
- भिखारियों को दान करें।
- भैरव चालीसा का पाठ करें।
- दुर्गा पूजा करें। व कन्याओं का पूजन व सेवा करें।
- शराब व तेल शमी वृक्ष पर चढायें।
- सूखा नारियल व बादाम दान करें।