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वे जुर्म करके भी बच निकले
January 17, 2020 • विक्रमादित्य सिंह

चन्द्रशेखर आजाद का जंम श्रावण सुदी द्वितीया सोमवार को दिन मे दो बजे हुआ था तदनुसार 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की अलीपुरा रियासत के भाँवरा गांव मे  सीताराम तिवारी और माता का जगरानी देवी के घर मे हुआ था उनका जमांक इस तरह है। वृश्चिक लग्न मकर मे केतु, कुंभ मे वक्री शनि, मिथुन मे गुरू, कर्क में राहू, मंगल, सूर्य बुघ, चन्द्र सिंह मे शुक्र। उनके जमांक मे कोई बंधन योग नही था 15 साल की उम्र मे वे बनारस मे पत्थर से एक दरोगा को घायल करने के इल्जाम मे एक रात हवालात मे रहे थे अगले दिन मजिस्ट्रेट ने उन्हें 15 बेंत की सजा देकर छोड़ दिया 27 फरवरी 1931 की सुबह़ 9 बजे आजाद अल्फ्रेड पार्क मे 32 मिनट तक पुलिस से मोरचा लेते हुये अंतिम गोली अपनी कनपटी पर मार कर आजाद शहीद हो गये। 
2. (एस्टोलाॅजिकल मैगजीन मार्च, 1968) पेज 312, एन एस कल्याणम के लेख प्लेनटस एंड क्रिमलन ट्रायल्स) मे दो सजा से बचने वाले जंमाकों का वर्णन है। सिंह लग्न मे बुध व शुक्र, कन्या मे सूर्य तुला मे चन्द्र केतु गुरू मेष लग्न मे शनि राहू, वृष मे मंगल, जातक धनी बली व प्रतिष्ठित था वो आने दो अंय दोस्तो के साथ दिसम्बर 1963 मे क्रिमलन केस मे गिरफतार हुआ वो 1964 मे लेखक से मिला लेखक ने जातक को बताया कि जमांक मे बंदी जीवन का का कोई योग नही है और वो 1965 के अंत तक इस मुसीबत से मुक्त हो जायेगा भविष्यवाणी सच हुयी तीन जातकों पर अपराधिक मुकदमा चलाया गया एक अपराधी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई बाकी दो पर कुछ समय तक केस चला बाद मे राज्य सरकार ने मुकदमा वापस ले लिया और बाकी दोनो अपराधी छोड़ दिये गये नवम स्थान पर शनि राहू योग ने यह संकट खड़ा किया बुध महादशा मे राहू के अंतरमे समस्या शुरू हुयी शनि के राहू के अंतर मे जांच हुयी गुरू के अंतर मे गिरफतारी हुयी नीच का शनि तृतीय भाव मे बैठे नीच ग्रहों से दृष्ट है। चन्द्र केतु व गुरू। राहू व शनि योग ने इन्क्वारी करवाई गुरू जमांक मे शुभ है। गुरू के अंतर मे मुकदमा चला पर जैस ही शनि महादशा शुरू हुयी केस वापस ले लिया गया षष्ठेश शनि नवम मे बाधक भाव मे है। जिसने बाधा दी भाग्येश मंगल कष्ट से ने मुक्ति दी द्वितीयस्थ लग्नेश मे जेल से मुक्ति दी सूर्य राज्य कारक है उसने खुद ही केस वापस ले लिया। 
3. तुला लग्न धनु मे गुरू, मीन मे मंगल व राहु, मेष मे शुक्र वृष मे सूर्य बुध व शनि कर्क मे चन्द्रमा व कन्या मे केतु। इस जमांक मे छठे भाव मे मंगल राहू योग है। मंगल मे मंगल के अंतर मे जातक गिरफतार हुआ आठवें भाव मे शनि बाधकेश सूर्य के साथ है। चतुर्थेश व सुखेश शनि का द्वादेश बुध के साथ अति अशुभ है जिसने अपराधिक मुकदमा दिया परन्तु यह योग अति निर्बल होने के कारण जातक को जेल नही जाने दिया तृतीय भाव मे शुक्र के नक्षत्र मे बैठे गुरू ने अमृत बरसा कर जातक की रक्षा की।   
4. धूसखोर फौजी अफसर जेल से बचा-जंम-20 जनवरी 1966। प्रातः-11.10 मिनट। भिलाई। जातक सेना की सिविल  इंजीनियर कोर मे मेजर था वो 7 जनवरी 2004 को राहू/शनि/शुक्रदशा  मे रिश्वत लेते हुये पकड़े गये  23 नवम्बर 2006 को उनका राहू/बुध/ सूर्य दशा मे कोर्ट मार्शल हुआ 6 अगस्त 2007 को जेल की सजा हुई। इन्होने हाईकोर्ट मे अपील की जो मंजूर हुयी और कोर्ट ने इनके सर्विस से निलम्बन आदेश तथा जेल भेजने पर रोक लगा दी जुलाई 2008 को इन्हें अच्छी प्राईवेट नौकरी मिल गई। इनका जमांक इस प्रकार हैं  मीन लग्न 26.50 अंश वृष मे राहू व गुरू वक्री, वृश्चिक मे केतु, धनु मे चन्द्र बुध, तकर मे सूर्य मंगल व शुक्र वक्री कुंभ मे शानि। 
 5. बिना जुर्म के फाँसी-ठा. रोशन सिंह 22 जनवरी 1892 को दिन11.30। शाहजहांपुर फांसी द्वारा मृत्यु 19 दिसम्बर 1927 प्रातः 7. 30 ईलाहाबाद। कृष्ण एकादशी सामेवार। जमांक मेष लग्न वृषमे राहू,कन्या मे शनि वक्री तुला मे चन्द्र वृश्चिक मे मंगल व केतु, धनु मे बुध मकर मे सूर्य, कुंभ मे गुरू व शुक्र
मृत्यु चक्र-धनु लग्न मे सूर्य मीन मे गुरू, वृष मे राहू तुला मे शुक्र, बुघ वृश्चिक मे मंगल शनि केतु बुध।
6. रमेश कुमार सिंह इंजीनियर-जंम 21/22 मई 1948। रात्रि-12.05 रात्रि। लखनऊ मकर लग्न मेष मे राहू वृष मे सूर्य बुध, मिथुन मे सूर्य, कर्क मे शनि सिंह मे मंगल तुला मे चन्द्र केतु धनु मे गुरू वक्री। जातक की 30 वर्षीय बहू शिक्षिका थी मई 2009 में उसका विवाह हुआ था गृह कलह से तंग आकर 30ो रात 10 बजे पंखे मे साड़ी से लटक कर ससुराल में आत्महत्या कर ली जातक हेल्थ ग्राउंड पर अस्पताल में भर्ती हो गया और और वहीं से उसे अरेस्ट स्टे मिल गया वो जेल जाने से बच गया केस अभी चल रहा है।